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- Meridian Wire

- Jan 20
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चीनी रेस्तरां में खूनखराबा, 7 की मौत; ISIS हमले के बाद काबुल की सुरक्षा पर फिर सवाल

अफगानिस्तान की राजधानी काबुल के शाहर-ए-नॉ (Shahr-e-Naw) क्षेत्र में एक रेस्तरां के पास/अंदर जोरदार धमाका हुआ, जिसे शहर के सबसे सुरक्षित इलाकों में से एक माना जाता है। यह इलाका दूतावासों, दफ्तरों और लोकप्रिय बाजारों के कारण संवेदनशील भी माना जाता है।
स्थानीय मीडिया और राहत संगठनों के अनुसार, इस विस्फोट में कम से कम 7 लोगों की मौत और लगभग 20 के आसपास लोग घायल हुए। घायलों में महिलाएँ, एक बच्चा और विदेशी नागरिक भी शामिल बताए गए हैं।
किसे निशाना बनाया गया
धमाका जिस रेस्तरां में हुआ या जिसके पास हुआ, वह चीनी नागरिकों के बीच लोकप्रिय था और आंशिक रूप से चीनी और अफ़ग़ान साझेदारों के स्वामित्व में बताया जा रहा है। कई रिपोर्टों में यह भी कहा गया कि हमले का निशाना उन चीनी नागरिकों या प्रतिनिधिमंडल को माना जा रहा है जो वहां अक्सर आते थे।
चीन के सरकारी प्रसारक के अनुसार, धमाके में कम से कम एक चीनी नागरिक की मौत और दो चीनी नागरिक गंभीर रूप से घायल हुए, साथ ही एक सुरक्षा गार्ड की भी जान गई। यह बात चीन–अफगानिस्तान संबंध और वहां मौजूद चीनी निवेश/प्रोजेक्ट्स को सीधे प्रभावित करती है।
हमले की जिम्मेदारी और संदिग्ध
एक चरमपंथी संगठन, इस्लामिक स्टेट (ISIS) के स्थानीय धड़े ने अपने प्रोपेगैंडा चैनल के माध्यम से इस हमले की जिम्मेदारी लेने का दावा किया। उनके बयान के मुताबिक यह एक आत्मघाती हमला था, जिसमें हमलावर ने विस्फोटक जैकेट का इस्तेमाल किया।
समूह ने दावा किया कि उसने तालिबान गार्डों और रेस्तरां में मौजूद लोगों को निशाना बनाकर 25 के आसपास लोगों को मारने या घायल करने की बात कही, हालांकि आधिकारिक तौर पर इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। अफ़ग़ान गृह मंत्रालय और पुलिस ने केवल मौतों व घायलों की संख्या का अनुमान दिया है और कारण की जांच जारी होने की बात कही है।
तालिबान सरकार पर सवाल
शाहर-ए-नॉ जैसा इलाका, जहां सुरक्षा कड़ी मानी जाती है, वहां इस तरह का आत्मघाती या IED धमाका होना तालिबान प्रशासन की सुरक्षा दावों पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। तालिबान 2021 में सत्ता में लौटने के बाद से दावा करता रहा है कि उसने देश में बड़े पैमाने पर हिंसा और आतंक को कम किया है, लेकिन ISIS जैसे समूहों के हमले यह दिखाते हैं कि सुरक्षा चुनौती अब भी गंभीर है।
इसके अलावा, विदेशी नागरिकों को निशाना बनाए जाने से यह संदेश भी जाता है कि अफगानिस्तान में निवेश, दूतावासों की गतिविधि और अंतरराष्ट्रीय संगठनों की उपस्थिति लगातार जोखिम में है। इससे मानवीय सहायता और विकास परियोजनाओं पर भी असर पड़ सकता है।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और मानवीय चिंता
धमाके में चीनी नागरिकों के घायल और मारे जाने की खबर के बाद चीन ने कड़ी प्रतिक्रिया दी और अफगानिस्तान से अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की। चीन पहले से ही अफगानिस्तान में खनन, आधारभूत संरचना और अन्य आर्थिक परियोजनाओं में दिलचस्पी दिखा रहा था, इसलिए इस तरह का हमला उसके लिए बड़ी चिंता का विषय है।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए यह घटना दो तरह की चिंता बढ़ाती है:
अफगानिस्तान में आम नागरिकों की सुरक्षा और लगातार हो रहे आतंकी हमलों से पैदा मानवीय संकट।
क्षेत्रीय स्थिरता, खासकर जब विदेशी नागरिक और प्रोजेक्ट्स बार-बार निशाना बनाए जा रहे हों।



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