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- Meridian Wire

- Jan 23
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भारत–यूएई मेगा साझेदारी: 2032 तक 200 अरब डॉलर व्यापार, ऊर्जा–रक्षा–डिजिटल सेक्टर में नई उड़ान

भारत–यूएई साझेदारी नई ऊँचाइयों पर, 2032 तक 200 अरब डॉलर व्यापार का लक्ष्य
भारत और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने अपने संबंधों को “स्ट्रेटेजिक इकोनॉमिक इंटीग्रेशन” के नए दौर में प्रवेश कराते हुए 2032 तक द्विपक्षीय व्यापार को 200 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक तक पहुंचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है। हाल की उच्चस्तरीय बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन ज़ायेद अल नाहयान ने इस रोडमैप पर सहमति जताई, जिसे दोनों देशों के बीच अब तक का सबसे बड़ा आर्थिक विज़न माना जा रहा है।
वित्त वर्ष 2023–24 में भारत–यूएई व्यापार लगभग 84–100 अरब डॉलर के बीच रहा, जो 2022 में लागू व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते (CEPA) के बाद तेज़ी से बढ़ा है। अब लक्ष्य है कि अगले छह–सात वर्षों में इस स्तर को दोगुना करके 200 अरब डॉलर पार किया जाए, ताकि खाड़ी क्षेत्र में भारत की आर्थिक उपस्थिति और मज़बूत हो और यूएई को भारत के विशाल बाज़ार और मैन्युफैक्चरिंग क्षमता से दीर्घकालिक लाभ मिल सके।
किन क्षेत्रों पर होगा सबसे बड़ा फोकस?
द्विपक्षीय रोडमैप में ऊर्जा, रक्षा, अंतरिक्ष, डिजिटल इकोनॉमी, परमाणु तकनीक, इंफ्रास्ट्रक्चर और एमएसएमई जैसे क्षेत्रों को प्राथमिक स्तंभ बनाया गया है। ऊर्जा के क्षेत्र में दीर्घकालिक LNG (तरलीकृत प्राकृतिक गैस) आपूर्ति समझौतों, रिफाइनिंग और पेट्रोकेमिकल परियोजनाओं में साझा निवेश और स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण पर सहयोग की योजना है, जिससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा को स्थिरता मिलेगी और यूएई को भरोसेमंद दीर्घकालिक ग्राहक आधार मिलता रहेगा।
रक्षा और अंतरिक्ष सेक्टर में दोनों देशों ने संयुक्त परियोजनाओं, तकनीकी सहयोग और को-डेवलपमेंट मॉडल के ज़रिए साझेदारी को गहरा करने पर सहमति जताई है। भविष्य में संयुक्त सैटेलाइट मिशन, अंतरिक्ष-आधारित सेवाओं का वाणिज्यिक उपयोग और उच्च-कौशल वाली नौकरियों का सृजन इस सहयोग का महत्वपूर्ण परिणाम हो सकता है, जिससे भारत की अंतरिक्ष क्षमताओं को अतिरिक्त बाज़ार और संसाधन मिलेंगे।
एमएसएमई, “भारत मार्ट” और नए बाज़ारों की योजना
इस नए चरण में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) को भारत–यूएई साझेदारी का अहम केंद्र बनाया गया है। दोनों पक्ष “भारत मार्ट”, वर्चुअल ट्रेड कॉरिडोर और “भारत–अफ्रीका सेतु” जैसी पहलों के माध्यम से भारतीय और अमीराती एमएसएमई को सीधे जोड़ने और उनके उत्पादों को मध्य पूर्व, अफ्रीका और यूरेशिया के बाज़ारों तक पहुंचाने की योजना पर काम करेंगे।
यह ढांचा केवल बड़े उद्योगों तक सीमित नहीं, बल्कि छोटे निर्माताओं, स्टार्टअप्स और सेवा प्रदाताओं के लिए भी नए अवसर खोलता है। डिजिटल प्लेटफॉर्म और वर्चुअल कॉरिडोर के ज़रिए छोटे उद्यम बिना बड़े निवेश के अपने उत्पादों को नए देशों तक भेज सकेंगे, जिससे निर्यात आधार व्यापक होगा और रोजगार के नए स्रोत बनेंगे।
धोलेरा, गिफ्ट सिटी और इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़ा निवेश
गुजरात के धोलेरा को विशेष निवेश क्षेत्र के रूप में विकसित करने में यूएई की संभावित भागीदारी को खास महत्व दिया जा रहा है। प्रस्तावित योजना के तहत यहां अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, ग्रीनफील्ड पोर्ट, स्मार्ट शहरी टाउनशिप, पायलट प्रशिक्षण स्कूल और मजबूत रेलवे–लॉजिस्टिक नेटवर्क विकसित किया जाएगा, जिससे पश्चिमी तट पर एक नया औद्योगिक और एविएशन हब खड़ा हो सकता है।
इसके साथ ही गिफ्ट सिटी में दुबई की डीपी वर्ल्ड और फर्स्ट अबू धाबी बैंक जैसी संस्थाओं की उपस्थिति से भारत–यूएई वित्तीय कनेक्टिविटी और गहरी होगी। इन संस्थानों के ज़रिए भारतीय कंपनियों को खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) और उत्तर अफ्रीका के बाज़ारों तक फाइनेंस और ट्रेड फसिलिटेशन की बेहतर सुविधा मिलेगी, जिससे डॉलर और दिरहम में होने वाले लेनदेन अधिक सुगम बनेंगे।
परमाणु, खाद्य सुरक्षा और डिजिटल भुगतान में नया अध्याय
दोनों देशों ने उन्नत परमाणु प्रौद्योगिकियों, विशेषकर बड़े रिएक्टरों और स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर्स (SMR) के विकास और संभावित तैनाती पर सहयोग की दिशा में गंभीर रुचि जताई है। उद्देश्य है कि भविष्य की स्वच्छ ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए सुरक्षित, टिकाऊ और किफायती परमाणु विकल्प तैयार किए जाएं, साथ ही संयंत्र संचालन, रखरखाव और सुरक्षा मानकों में संयुक्त अनुभव साझा किया जाए।
खाद्य सुरक्षा को दोनों देशों ने रणनीतिक विषय मानते हुए सतत कृषि, स्टोरेज, लॉजिस्टिक्स और एग्री-टेक नवाचार में मिलकर काम करने का निर्णय किया है। इससे भारत के कृषि उत्पादों को खाड़ी क्षेत्र में स्थिर बाज़ार मिलेगा, जबकि यूएई को भरोसेमंद आपूर्ति श्रृंखला, विविध स्रोत और कीमतों में अपेक्षाकृत स्थिरता हासिल होगी।
डिजिटल क्षेत्र में सीमा-पार भुगतान को तेज़ और सस्ता बनाने के लिए दोनों देशों के राष्ट्रीय भुगतान प्लेटफॉर्म्स को जोड़ने की योजना पर काम हो रहा है। सुपरकंप्यूटिंग क्लस्टर, डेटा सेंटर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी परियोजनाओं के ज़रिए भारत में डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा मिलेगा और यूएई को टेक निवेश के नए अवसर मिलेंगे।
युवाओं, स्टार्टअप्स और लोगों के बीच सीधा संपर्क
नई साझेदारी का एक महत्वपूर्ण आयाम लोगों के बीच संपर्क को बढ़ाना है। दोनों देशों ने छात्रों, युवा उद्यमियों, प्रोफेशनल्स और सांस्कृतिक समूहों के बीच आदान–प्रदान कार्यक्रम बढ़ाने पर जोर दिया है, ताकि आर्थिक रिश्तों के साथ–साथ सामाजिक और सांस्कृतिक समझ भी गहरी हो। यह प्रयास खाड़ी देशों में काम कर रहे भारतीय प्रवासी समुदाय और भारत में बसे अमीराती निवेशकों के लिए भी सकारात्मक वातावरण तैयार करेगा।
स्टार्टअप इकोसिस्टम में संयुक्त फंडिंग, इनोवेशन हब और टेक्नॉलॉजी पार्क जैसे मॉडल पर चर्चा हो रही है, जिससे फिनटेक, हेल्थटेक, क्लीन एनर्जी, एग्रीटेक और स्पेस टेक जैसे क्षेत्रों में भारत–यूएई संयुक्त ब्रांड वैश्विक स्तर पर उभर सकता है। यह न केवल पूंजी, बल्कि मेंटरशिप, बाज़ार तक पहुंच और नियामकीय सहयोग का नया फ्रेमवर्क तैयार करेगा।
निष्कर्ष: 200 अरब डॉलर का लक्ष्य सिर्फ आंकड़ा नहीं, व्यापक विज़न
भारत–यूएई द्वारा 2032 तक 200 अरब डॉलर से अधिक द्विपक्षीय व्यापार का लक्ष्य तय करना केवल एक आर्थिक आंकड़ा नहीं, बल्कि दोनों देशों के बीच बहु-स्तरीय, दीर्घकालिक और भरोसेमंद साझेदारी का रोडमैप है। ऊर्जा से लेकर अंतरिक्ष, परमाणु से लेकर डिजिटल भुगतान, और एमएसएमई से लेकर बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर तक फैला यह विज़न आने वाले वर्षों में भारत को खाड़ी क्षेत्र के लिए और यूएई को दक्षिण एशिया के लिए सबसे महत्वपूर्ण साझेदार के रूप में स्थापित कर सकता है।



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