माघ मेला स्पेशल: संगम पर आस्था का सैलाब और शंकराचार्य विवाद का संग्राम
- Meridian Wire

- Jan 19
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3–4 करोड़ भक्तों के बीच शंकराचार्य को संगम स्नान से रोक दिया गया: माघ मेला में आस्था बनाम प्रशासनिक ‘वीआईपी निषेध’ टकराव

प्रयागराज माघ मेला के मौनी अमावस्या स्नान पर प्रशासनिक अनुमान के अनुसार इस बार संगम क्षेत्र में करोड़ों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचे और दिन भर पवित्र स्नान का सिलसिला चलता रहा। सबसे अधिक भीड़ रात 12 बजे से दोपहर तक रही, जब लाखों लोगों ने एक साथ घाटों पर पहुंचकर डुबकी लगाई।
अनुमानित श्रद्धालु संख्या
मेला प्रशासन और अधिकारियों ने मौनी अमावस्या पर लगभग 3 से 4 करोड़ श्रद्धालुओं के संगम क्षेत्र में आने का अनुमान व्यक्त किया है। जिला प्रशासन के अनुसार दोपहर तक ही 3 करोड़ से अधिक श्रद्धालु पवित्र स्नान कर चुके थे, जबकि आधी रात से तड़के 4 बजे तक करीब 50 लाख लोगों ने डुबकी लगा ली थी। आने‑जाने का सिलसिला पूरे दिन जारी रहने से कुल फुटफॉल 3.5 से 4 करोड़ के दायरे में माना जा रहा है, हालांकि अंतिम आधिकारिक आँकड़े अभी संकलन की प्रक्रिया में हैं।
शंकराचार्य प्रकरण का घटनाक्रम
मौनी अमावस्या के दिन सबसे अधिक चर्चा में रही घटना शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़ी रही, जिन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें और उनके अनुयायियों को संगम पर स्नान करने से रोका गया। शंकराचार्य का कहना है कि जब उनका पालकी‑यात्रा जुलूस संगम नोज की ओर बढ़ रहा था, तभी पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने बीच रास्ते में बैरिकेड लगाकर रास्ता बंद कर दिया और उन्हें वापस लौटने के लिए मजबूर किया।
आरोप, टकराव और तनाव
शंकराचार्य ने दावा किया कि इस दौरान उनके कई अनुयायियों को धक्का देकर हटाया गया तथा कुछ के साथ हाथापाई भी हुई, जिससे संत‑समर्थकों में आक्रोश फैल गया। लगभग दो से तीन घंटे तक पुलिस और करीब 200 के आसपास समर्थकों के बीच नोकझोंक, नारेबाजी और जोर‑आजमाइश की स्थिति बनी रही, जिसके कारण मेला क्षेत्र के उस हिस्से में तनाव बढ़ गया और भीड़ को दूसरी दिशा में मोड़ना पड़ा। अंततः शंकराचार्य बिना स्नान किए ही अपने अखाड़े की ओर लौट गए, जिसे उन्होंने धार्मिक स्वतंत्रता और सम्मान के साथ खिलवाड़ बताते हुए सार्वजनिक रूप से मुद्दा बनाया।
प्रशासन की सफाई
पुलिस और मेला प्रशासन की ओर से यह तर्क दिया गया कि मौनी अमावस्या जैसी भीड़‑भाड़ वाले दिन संगम नोज के हिस्से में किसी भी तरह की विशेष या वीआईपी आवाजाही की अनुमति नहीं थी, ताकि आम श्रद्धालुओं की आवाजाही और सुरक्षा प्रभावित न हो। अधिकारियों के अनुसार शंकराचार्य और उनके अनुयायियों से अनुरोध किया गया था कि वे सामान्य मार्ग से पैदल स्नान के लिए जाएं, लेकिन पालकी जुलूस पर अड़े रहने के कारण मार्ग अवरुद्ध होने और भीड़ के दबाव को देखते हुए उन्हें आगे बढ़ने नहीं दिया गया। प्रशासन का कहना है कि क्षेत्र की स्थिति अब सामान्य है, हालांकि संत समुदाय के कुछ प्रतिनिधि इस घटना को गंभीरता से उठा रहे हैं और आगे संवाद की संभावना बनी हुई है।



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